Computer Basic in Hindi Notes - कम्प्यूटर बेसिक ज्ञान

कम्प्यूटर शब्द की उत्पति लैटिन भाषा के Compute शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है गणना करना। 


‘‘कम्प्यूटर एक इलेक्ट्राॅनिक संयन्त्र है जो संख्यात्मक या तार्किक आँकड़ों को तीव्र गति से सटीकता तथा यथार्थता के साथ संचित, नियन्त्रित एवं संसाधित कर सकता है।’’

इसी कारण से कम्प्यूटर को गणना करने वाली मशीन माना गया है। परन्तु आधुनिक युग में इसका कार्यक्षेत्र काफी विस्तृत और व्यापक हो गया है। इसलिए इसे ‘संगणक’ अथवा ‘अभिकलित्र’ कहना उचित होगा।

कम्प्यूटर के कार्य को समझने के लिए महत्वपूर्ण प्रयुक्त शब्द निम्नवत् हैं - 

डाटा (Data)- डाटा शब्द की उत्पति लैटिन भाषा के Datum शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है तथ्य। यह तथ्यों एवं आँकड़ों का एक संग्रह है जो प्रत्यक्ष या सीधा उपयोग करने योग्य नहीं होता। 

संसाधन (Processing) इसका अर्थ है, ऐसी संक्रियाएँ करना जिसमे डाटा उपयोग करने योग्य बन जाए। 

सूचना (Information) डाटा का संसाधित या अन्तिम परिणाम जिसे सीधे उपयोग किया जा सके और जो कोई सार्थक परिणाम देता हो। 

आधारभूत संक्रियाएँ (Basic Operations) इनपुट, स्टोरिंग, प्रोसेसिंग, आउटपुट, कण्ट्रोल आदि कम्प्यूटर द्वारा सम्पन्न की जाने वाली आधारभूत संक्रियाएँ हैं। 

कम्प्यूटर का तात्पर्य एक ऐसे यन्त्र से है जिसका उपयोग गणना, प्रक्रिया, यान्त्रिकी, अनुसन्धान, शोध कार्यों में किया जाता है। 

कम्प्यूटर के अंग - Parts of Computer

इनपुट इकाई (Input Unit)- यह प्रयोक्ता से डाटा एवं निर्देश प्राप्त करता है और स्वीकृति निर्देशों को मशीनी भाषा में बदलता है। यह प्रोसेसिंग के लिए परिवर्तित निर्देश सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट CPU को देता है। 

सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit)- कम्प्यूटर के सभी कार्य प्रोसेसिंग के द्वारा ही होता है। जिसे कम्प्यूटर का मस्तिष्क भी कहते हैं। यह कम्प्यूटर सिस्टम के सभी भागों को नियन्त्रित करता हैं। 

आउटपुट इकाई (Output Unit)- यह सीपीयू से संसाधित डाटा परिणाम प्राप्त करता है। यह परिणामों को मशीनी भाषा में सामान्य भाषा में बदलता है। यह प्रयोक्ता को परिणाम दिखाता है एवं प्रिन्ट करता है। 

कम्प्यूटर के गुण - Characteristics of a Computer

कम्प्यूटर गति (Computer Speed)- कम्प्यूटर पलभर में लाखों गणनाएँ कर सकता है। यह इतना तीव्र होता है कि एक सेकेण्ड में हाजारों-लाखों गणितीय क्रियाएँ एकसाथ कर सकता है। अर्थात् कम्प्यूटर में आँकड़ों को तीव्र गति से संसाधित किया जा सकता है। 

कम्प्यूटर शुद्धता (Computer Accuracy)- कम्प्यूटर कठिन-से-कठिन प्रश्न का भी बिना किसी त्रुटि के परिणाम निकाल देता है। इसमें शुद्ध निर्देशों (Instructions) एवं आँकड़ों के द्वारा त्रुटिविहीन सूचनाएँ प्राप्त होती है। कभी कभी प्रोग्रामर के द्वारा गलत प्रोग्राम बन जाने के कारण कम्प्यूटर गलत सूचना प्रदान कर सकता है परन्तु इसके द्वारा दि गए परिणाम हमेशा सही होते है। 

उच्च संग्रह क्षमता (High Storage Capacity Computer) - कम्प्यूटर अपनी मेमोरी सूचनाओं का विशाल भण्डार संचित कर सकता है। इसमें अथाह आँकाड़ों एवं प्रोग्रामों के भण्डराण की क्षमता होती है। 

कम्प्यूटर का इतिहास - History of Computers  

आधुनिक कम्प्यूटरों को अस्तित्व में आए हुए लगभग 50 वर्ष हुए है, लेकिन इसके विकास का इतिहास बहुत पुराना है। कम्प्यूटर का जो रूप हम आजकल देख रहे हैं, यह अचानक ही प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि यह हजारों वर्षों की वैज्ञानिक का आविष्कार और मेहनत का फल है। 

जब से मनुष्य से गीनना सीखा है तब से उनका प्रयास रहा है कि गणना करने में सहायता करने वाले यन्त्रों का निर्माण किया जाये। संख्या पद्धति (Number System) के प्रयोग तथा भारतीय गणितज्ञों द्वारा ‘शून्य’ का आविष्कार किए जाने के बाद मानव के लिए संख्याओं का महत्व बहुत बढ़ गया था, इसलिए गणना में सहायक यन्त्रों की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी। इसके परिणामस्वरूप सबसे पहले गिनतारा (Abacus) अस्तित्व में आया और बाद में भी कई यन्त्रों का निर्माण किया गया।
  1. गिनतारा (Abacus) इस यंत्र का आविष्कार इतिहास 5000 वर्ष से भी ज्यादा पुराना है। यह गणना में सहायक प्रथम यंत्र था। 
  2. नेपियर बोन्स (Napier's Bones) इसका आविष्कार जाॅन नेपियर ने सन् 1617 में किया।
  3. स्लाइड रूल (Slide Rule) इसका आविष्कार सन् 1620 में जर्मनी के गणितज्ञ विलियम आटरेड ने किया। 
  4. पास्कल का गणना यंत्र (Pascal's Calculators) गणना करने वाला यह यंत्र महान् फ्रांसीसी गणितज्ञ और दार्शनिक ब्लेज पास्कल ने सन् 1642 में बनाया था। इसे पास्कल का कैलकुलेटर या पास्कल की एडिंग मशीन भी कहते है।
  5. लेबनीज का यांत्रिक कैलकुलेटर (Mechanical Calculator of Leibnitz) यह यंत्र लेबनीज ने सन् 1671 में पास्कल के कैलकुलेटर में कई सुधार करके बनाया। 
  6. बैबेज का डिफेंस इंजन (Difference Engine of Babbage) प्रोफेसर चार्ल्स बैबेज ने एक ऐसा यंत्र बनाया जो दशमलव के बाद 20 स्थानों तक शुद्ध गणना कर सकता था। इसलिए बैबेज को आधुनिक कम्प्यूटर का जनक (पिता) कहा जाता है।
  7. बैबेज का एनलिटिकल इंजन (Analytical Engine of Babbage) अपने डिफेंस इंजन की सफलता से उत्साहित होकर बैबेज ने यह यंत्र बनाया जो आश्चर्यजनक रूप से आज के कम्प्यूटर से मेल खाता था। 
  8. पंचकार्ड उपकरण (Punched Card Devices) जोसेफ मेरी जैकार्ड ने सन् 1801 में इस मशीन का आविष्कार किया। इसलिए इसे जैकार्डस् लूम (Jackard's Loom) भी कहते थे। 

प्रारम्भिक कम्प्यूटर - प्रारम्भिक कप्यूटर इस प्रकार थे। 
  1. 1943 में मार्क 
  2. 1942 में अटन सोफ बैरी 
  3. 1946 में एनिएक 
  4. 1949 में एडसैक
  5. 1950 में एडवैक
  6. 1951 में लिओ
  7. 1951 में यूनीवैक

नोट- सन् 1952 से आईबीएम ने कम्प्यूटर बनाना व बेचना शुरू कर दिया। 

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